बाबा रामदेव लोगो को गुमराह कर रहे हैं ? : संतोष शर्मा

बाबा रामदेव लोगो को गुमराह कर रहे हैं ? 

संतोष शर्मा 

             आज बिज्ञान के युग में एक से बढकर एक योगी अपने मन मर्जी योग, समाधि, प्राणायाम इत्यादि  का प्रचार कर रहे हैं। ऐसे योगीयों में एक हैं बाबा रामादेव। विभिन्न प्रचार माध्यम तथा योग शिबिरों द्वारा बाबा रामदेव लोगों को योग से सभी रोग दूर भागने का दावा कर रहे हैं। सीधे शब्दों में बाबा जिस तरह से कहते हैं वैसा ही करते रहिए और रोगों से मुक्त से मुक्त हो जाईये।  बाबा रामदेव के पास किसी भी सवाल का जबाव है। एक ओर वे आध्यात्मिक शक्ति के आधार  हैं  तो दूसरी ओर  अत्यंत व्यवसायी बुद्धि के अधिकारी हैं।  बाबा अपनी बातों  से लोगों को जिस तरह से प्रभावित कर रहे हैं उससे लगता है, वो दिन दूर नहीं जब बीमारी नाम की कोई चीज ही नहीं रहेंगी।
               आइये जरा देखे, बाबा रामदेव का जो योग प्रचार-प्रसार है उसमें कितना सही और कितना खोखला  पन  है।

                 बाबा रामदेव की लिखी हुई किताब  'योग  चिकित्सा रहस्य ' से कई मधुर बनें-

                *महर्षि व्यास योग का अर्थ समाधि करते हैं।
                   संयमपूर्वक साधन करते हुए। आत्मा  का          
                  परमात्मा के साथ योग करके      
                  (जोड़कर)समाधी का आनंद लेना योग है।   
                  (पृष्ठा -1)

                  योग का अस्तित्य ईश्वर    अस्तित्य पर टिका हुआ है। ईश्वर का अस्तित्य न होने का अर्थ योग का अस्तित्य को नकारना है। ईश्वरीय शक्ति कहने का अर्थ - ईश्वर  है। क्या बाब रामदेव हमारी भारतीय विज्ञान व युक्तिवादी समिती के सामने अपनी ईश्वरीय शक्ति का प्रमाण देंगे ? हमें पता है कि  बाबाजी हमारी चुनौती का सामना कभी नहीं करेंगे क्योंकि उन्हें भलीभांति अपनी दौड़ पता है। अत: कोई नया बहना बनाकर चुनौती से पीछा छुड़ाना चाहेंगें।

          *पचास वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति प्रातराश न लें तो अच्छा है।(पृष्ट-5)

             खाद्य वैज्ञानिक यह मानने लगे हैं कि यदि सुबह का नाश्ता भरपेट नहीं किया गया तो इंसान कई तरह के तोगों का शिकार हो जाता है। सुबह में भरपेट भोजन के बाद इंसान दिन भर तरोताजा और उर्जावान बना रहता है। 
                         
                 *भोजन के प्रारम्भ में ओम् का स्मरण या गायत्री अदि मंत्रजय के साथ तीन आचमन करने चाहिए(पृष्ठ-5)

               धर्मगुरु हमें बतातें हैं कि भोजन ईश्वर ने हमें दिये है उसका स्मरण करने के पश्चात भोजन ग्रहण करना चाहिए। इन धर्मगुरुओं का मानना है कि  यह संसार ईश्वर की मर्जी से चल रहा है, इंसान खिलौना है और ईश्वर खिलाड़ी , उनकी मर्जी के बिना इंसान कुछ भी नहीं कर सकता है।

                 ' इंसान कुछ भी नहीं कर सकता है '- इस तरह की बेवकूफी भरी बातें बनाने वाले साधु, धर्मगुर, बाबा, या तो मूर्ख है या धोखेबाज।परंतु , इन बाबाओं क एक ही मतलव रहत हैं, ' राम-नाम जपना और पराया मॉल अपना '। सीधे शब्दों में आम आदमी को बेवकूफ बना कर धंधेबाज धर्मगुरु, बाबाजी अपनी झोली भरते हैं।
                
                *ईश्वर  सदा ही हमारी आवश्यकता और पात्रता से अधिक ही हमें रूप, यौवन, धन, समृद्धि व वैभव प्रदान करते हैं।(पृष्ठ-14)     
           
                  इस देश में 70 प्रतिशत लोग गरीब हैं। 30 प्रतिशत से ज्यादा लोग गरीबी-रेखा के नीचे हैं। इन लोगों के पास न तो सर छूपाने लायक घर है, न पीने का पानी, न तन ढकने के लिए कपड़े, न इलाज करने की सुविधा, न शिक्षा का मौका ओर न ही पेट भरने के लिए दो वक्त की रोटी। अपुष्टि, गरीबी, भूखमरी  को झेलते हुए इन लाचार लोगों को 'ईश्वर  सदा ही ... प्रदान करते हैं।'- ऐसी बातें बातें सुनाने वाले बाबा, धर्मगुरु आदि समाज के दुश्मन हैं। 

            आसन के सिद्धि हो जाने पर श्वास- प्रश्वास की गति को यथाशक्ति नियन्त्रित करना प्राणायाम कहलाता है। ( पृष्ठ - २० ) 
             अंगुष्ठ के माद्यम से दिहिनी नासिका को बंद करके बाई नासिका से श्वास अंदर भरना  चाहिए। श्वास अंदर भरने के बाद अनामिका व मध्यमा से बाम स्वर  बंद करके दाहिने नासिका से श्वास बाहर छोड़ दें। अब , दांए नासिका से श्वास अंदर भरे तथा बाई नासिका से छोड़ें। इस प्रकार इस बिधि को सतत् करते रहना चाहिए। 

            बाबा रामदेव से लेकर कई योगियों ने इस तरह से श्वास - प्रश्वास गति को यथाशक्ति नियन्त्रित करने को प्राणायाम कहा है। किसी बी एक नासिका छिद्र को बंद करके श्वास- नली द्वारा श्वास- प्रश्वास के गति को नियन्त्रित किया जा सकता है - ऐसी बातें सोचना सरासर मुर्खता होगी क्योंकि नासिका छिद्र श्वास- नली से जुडी हुई हैं। श्वास - नली एक है , दो नहीं। 
           अतः किसी एक नासिका छिद्र को करने का मतलब श्वास - नली के एक है और बंद कर देना - इस तरह की बातों पर विश्वास करना सरकार गलतफहमी होती। 

          आखिर तक ' प्राणायाम ' में श्वास - प्रश्वास नियन्त्रण एक बहुत बड़ा ढकोसला है , जो बेवकूफों के बाजार में खूब चल रहा हैं। 

           बाबा रामदेव हटयोग ' सिद्धि योगी हैं। हटयोग में उड्डीयन बन्ध लगाकर पक्षी की भांति आसमान में उड़ सकते है , मृत्यु पर विजय प्राप्त कर सकते है - इसमें कोई संदेह नहीं हैं। परंतु , एक सवाल है क्या बाबा रामदेव हमारी ' भारतीय विज्ञान व युक्तिवादी  समिति ' के सामने उड़ कर दिखाएंगे ? या हठयोग सिद्धि की बातें बना कर पल्ला झाड़ देंगे ? क्योंकि  बाबा जो बातें कहते है उन्हें कर दिखने की क्षमता  उनमें नहीं है। 

         इस पृथ्वी पर मुद्रा के समान सफलता देने वाला अन्य कोई कर्म नहीं है। हस्त मुद्राएं तत्काल ही असर करना शुरू कर देती है। ( पृष्ठ - १३३ )

        प्राण मुद्रा से लाभ : यह मुद्रा आँखों के दोषों को दूर करके नेत्र ज्योति बढती हिया। ( पृष्ठ - १३५ )

         क्या बाब रामदेव सचमुच ' प्राण मुद्रा ' में विश्वास करते हैं ? वो अपनी बाई आंख फड़फडाने की बीमारी को ' प्राण मुद्रा ' से ठीक क्यों नहीं कर लेते हैं ? लोग कहेंगे , जो बाबा लोगों की सभी रोग ठीक कर देने की बातें करते हों और स्वयं ही रोग से पीड़ित हों , तब उनकी बातों पर कौन विश्वास करेगा ?

 खेचरी  के अभ्यास से अमृत ग्रन्थि  से अमृत रस ( मीठा रस ) स्त्रवित होने लगता है। साधक को निद्रा , भूख व प्यास आदि नहीं सताते। ( पृष्ठ _ १३८ )

            अर्थात बाबा रामदेव ' खेचरी मुद्रा ' सिद्धि योगी हैं। इसका मतलव बाबा रामदेव अमर रहेंगे ? अगर बाबा की मृत्यु हो गयी तो , इससे साबित होगा कि  बाबा का दावा झूठा है या योग की बातें झूठी हैं। परंतु , एक और सवाल - बाबा रामदेव फला - आहार करते हैं ? पानी पीते हैं ? ' खेचरी मुद्रा ' सिद्धि होने पर उनको तो भूख - प्यास नहीं लगनी चाहिए। क्या इस ' परंतु ' का जवाब बाबा के पास हैं ? 

 मुक़ाबला  : प्रवीर घोष वनाम बाबा रामदेव 

७ जनवरी , २००६।  रात १० से ११. ३० तक ' NDTV इंडिया ' पर ' भारतीय विज्ञान व युक्तिवादी  समिति ' के महासचिव प्रवीर घोष और बाबा रामदेव के बीच मुक़ाबला  दिखाया गया।  इस मुक़ाबले में प्रवीर घोष ने रामदेव की लिखी हुई किताब 'योग  चिकित्सा रहस्य ' को दिखाकर बाबा रामदेव पर सवाल उठाते रहे और रामदेव को चुनौती दिये। 

  इस मुक़ाबले का कुछ अंश -
           
   प्रवीर घोष ने बाबा रामदेव से पूछा , ' आप जो दवाई बनाते हैं , उसके लिए ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट से लाइसेंस लिया है ? क्या डिपार्टमेंट ने दवाओं की जांच - पड़ताल करने के बाद दवा बनाने की इजाजत दी है ? अगर किसी व्यक्ति के मन में यह संदेह हो की इसमें कोई गड़बड़ी है , वह व्यक्ति  ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट  के पास शिकायत कर सकता है। छानबीन के बाद यदि देखा गया कि  बिना लाइसेंस  के दवाईयां बनायी जा रही हैं , तो बिना  लाइसेंस  की दवा बनने के खिलाफ ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट  पुलिस के पास शिकयत करेगी तथा मुकदमा सरकार और अभियुक्त व्यक्ति का बीच चलेगी। 

      ' The Drugs and Magic Remedies ( Objectionable Advertisements ) Act , 1954 ' के तहत मंत्र - तंत्र , जादू , योग , हस्त- मुद्रा इत्यादि से रोग ठीक हो जाएगा। इस तरह के कोई भी प्रलोभन , जो रोग का इलाज , निवारण या दूसरे प्राणी की जैविक क्रिया को प्रभावित करने वाली किसी भी प्रयास को निषेध किया गया है। 

           बाबा रामदेव कहते हैं , ' मैं ने हजारों लोगों पर योग का परिक्षण किया है। हजारों कैंसर मरीज को अच्छा किया है। '
          
              प्रवीर घोष का कहना अहि , ' ज्योतिषी - तांत्रिक भी कहते हैं कि  उन्होंने हजारों मरीजों को अच्छा किया हैं। मैं आप के पास एक कैंसर मरीज भेजूंगा।  क्या आप उस मरीज को स्वस्थ कर सकेंगे ? अगर उसकी मृत्यु हो गयी , तो उसका जुम्मेवार आप होंगे। 

         इतना सुनने के बाद बाबा रामदेव गुस्से से भड़क गये। 

           
          संचालक देवांजी ने प्रवीर घोष के बारे में कहा कि , ' अप Rationalist हैं , हर चीज को ठोक - बजा कर देखते हैं। 

         प्रवीर घोष ने एक और सवाल उठाया , ' दोनों हाथों के नाखूनों को आपस में रगड़ने से क्या गंजे के सिर पर बाल आजाएगा ?

          इस सवाल के जवाब  बाबाजी हजारों लोगों  आंकड़ा देने लगे। परंतु , प्रवीर घोष की चुनौती  सामना करने की हिम्मत उनमें नहीं थी। 

         प्रवीर घोष बाबा रामदेव से बोले , ' अप अपनी किताब  'योग  चिकित्सा रहस्य ' में लिखा है , ' प्राण मुद्रा ' आंखों के दोषों को दूर करके नेत्र ज्योति बढाती है , तो अप ' प्राण मुद्रा  ' करके अपनी बाई आंख फड़फाड़ने की बीमारी को क्यों ठीक नही कर लेते हैं ?

              चुनौतीओं की बातों से बाबा रामदेव गुस्से से आग बबूला हो गए। 

               मुक़ाबला के अंत तक प्रवीर घोष की चुनौती का जिक्र बाबा रामदेव के सामने किया गया। मगर।, रामदेवजी हजारों लोगों को ठीक कर देने की गिनतियां गिनते रह गये। 

              किसी भी स्तिथि में प्रबीर घोष की चुनौती का सामना करने के लिए तैयार नहीं हुए। शायद , प्रवीर घोष की चुनौती का सामना करके  असलियत का  भंडाफोड़ न हो जाये , ' जो जितना बड़ा जोगी , वो उतना बड़ा ढोंगी। '

' आजतक ' पर प्रवीर घोष की चुनौती

           ९  जनवरी २००६। ' आजतक ' न्यूज चैनल पर प्रवीर घोष ने एक बार फिर बाबा रामदेव को चुनौती दी। प्रवीर घोष के सवाल के जवाब में योग- विशेषग्य हिमाद्री समद्दार ने कहा कि , ' योगासन या योग- व्याम से शारीर स्वस्थ रहत हैं , बस इतना ही।  परंतु , अगर कोई कहे कि योग से सभी रोग खत्म किये जा सकते है ,तो वह सरासर गलत फहमी होगी। 

          इतना सबा कुछ जानने के बाद क्या अप लोग इस तरह की बातों पर विश्वास करेंगे कि  ' योग से सब रोग ठीक हो सकता है ' ? क्या योग- प्राणायाम लोगों को उल्लू बनाने की एक तरकीब है ? इसलिए किसी भी बात पर विश्वास करने से पहले अपने दिमाग से सोचें कि उसमें कितनी सच्चाई है। उसके पश्चात ही उस अपनाइये या ठुकराइये।

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